बस अब तो सच्चाई की इंतिज़ार है !!!!

कह गए वो न जाने क्या

रह गए हम न जाने कहाँ

थम गए वक्त न जाने क्यों

हिल गयी धरती न जाने कैसे

पथ तो एक है पथिक अनेक हैं

पंथ तो एक है पंथी अनेक हैं

अन्ना तो एक है मशाल अनेक हैं

देश तो एक है देशवासी अनेक हैं

ह्रदय की पुकार है

संत की सत्कार है

जाग उठा है आज सारा हिन्दूस्तान

बस अब तो सच्चाई की इंतिज़ार है !!!!

अमरदीप गौरव

इंसान हूँ मैं इंसान हूँ

पथिक हूँ प्यासा हूँ

पथिक हूँ जिंदगी का

प्यासा हूँ खुशी का

उम्मीद है मंजिल का

कहानी हूँ कविता हूँ

कहानी हूँ किताबों का

कविता हूँ जिंदगी के आयामों का

उम्मीद है पढ़े जाने का

पंक्षी हूँ कंक्षी हूँ

पंक्षी हूँ नीले गगन का

कंक्षी हूँ हरे चमन का

उम्मीद है डटे रहने का

नाव हूँ पतवार हूँ

नाव हूँ उलटी धार का

पतवार हूँ उस नाव का

उम्मीद है पार लगजाने का

कलम हूँ कलाकार हूँ

कलम हूँ उजागर करने का

कलाकार हूँ नया संशार गढ़ने का

उम्मीद है नया संशार बनने का

पथिक हूँ प्यासा हूँ

कहानी हूँ कविता हूँ

पंक्षी हूँ कंक्षी हूँ

नाव हूँ पतवार हूँ

कलम हूँ कलाकार हूँ

हर छन में मैं

अलग अलग अवतार हूँ

इंसान हूँ मैं इंसान हूँ

अपनी कल्पनाओं से अनजान हूँ |

अमरदीप गौरव

उनसे हुई मुलाकातों को याद करतें हैं

जिंदगी के रास्तें में एक चौराहे पर आकर

कभी हम उन्हें तो कभी हम

उनसे हुई मुलाकातों को याद करतें हैं

कभी समंदर के किनारे तो कभी

पगडंडियों पर हम यूं ही ठमक जातें हैं

शीतल मलय पवन में आती उनकी आवाजों में

हम यूं ही बहे चले जातें हैं यूं ही खोये चले जातें हैं

पता नहीं आगे रास्ते में उनसे हमारी मुलाकात कब होगी

जब भी होगी वादा रहा फिर अपनी आँखों को रोने न देंगे….

अमरदीप गौरव

मेरी जिंदगी के सूनेपन में आपका यूं आना मुझे अच्छा लगा

मेरी जिंदगी के सूनेपन में आपका यूं आना मुझे अच्छा लगा
समय की खामोशियों में आपका यूं कुछ गुनगुनाना मुझे अच्छा लगा
आपकी गुनगुनाहट में यूं मेरा खो जाना मुझे अच्छा लगा
मेरी मुस्कराहट पे आपका यूं शर्माना मुझे अच्छा लगा
हमारी दोस्ती पे यूं आपका इतराना मुझे अच्छा लगा
इस संसार में आपका यूं मिलना मुझे अच्छा लगा
मेरी कामयाबी के पीछे आपका यूं रहना मुझे अच्छा लगा
मेरी गलतियों पर आपका यूं समझाना मुझे अच्छा लगा
फूलों की तरह आपका मेरे गुलिस्तां में यूं महकना मुझे अच्छा लगा
प्यार भरी निगाहों से आपका यूं निहारना मुझे अच्छा लगा
मेरी हर ख्वाहिसो पर आपका यूं धयान रखना मुझे अच्छा लगा
नाविक की तरह आपका मेरी जिंदगी को यूं पार लगाना मुझे अच्छा लगा
आपका मेरी जिंदगी में यूं अहम हिस्सा बन जाना मुझे अच्छा लगा |

अमरदीप गौरव

मगर पता नहीं वो मुझे क्यों बदर किए बैठे हैं…

मेरी हर सोच में मेरी हर सास में
किसी की बातों में किसी से मुलाकातों में
किसी भी किताब के हर पन्नों में
हर किसी की आँखों में
तो अपनी हाथों की हर लकीरों में
पानी में फेके हुए पत्थर से उठी हर तरंगों में
सूर्य की आती हुई हर किरणों में
पंछिओं की चहचाहट में
रातों की खामोशिओं में
घड़ी की टिक टिक कर गुजरते हर पलों में
पानी की गिरती हर एक बूंदों में
अपने लिखे हर शब्दों में
हर गीतों में हर कहानियों में
चित्रकारों की नूमाईशों में
हवाओं में फिजाओं में लहरों में तूफानों में
अपनी हर कविता की कल्पनाओं में
मैं !! उन्हें तलाशने की कोसिस करता हूँ…
वो मेरी जिंदगी में कुछ इस कदर सामिल हैं!!
मगर पता नहीं वो मुझे क्यों बदर किए बैठे हैं…

अमरदीप गौरव

ठान अपने शतक के शतक का इरादा तू !!

दिखा दे अपनी आन तू
बना  ले अपनी सान तू
सजा ले अपनी कृपाण तू
कर ले तिरंगे को सलाम तू !!

खेल जा अपनी अरमान तू
लगा दे अपनी जान तू
दे पटखनी वार तू
साथ है हिंदुस्तान ये जान तू !!

बुलंद कर इरादा तू
कर अपनी कद जादा तू
कर अपनी शतक का वादा तू
ठान अपने शतक के शतक का इरादा तू !!

अमरदीप  गौरव

Dedicated to “God of Cricket” SR Tendulkar best of luck Indian Cricket Team ….

दूर जाना था तो पास क्यों आये …

दूर जाना था तो पास क्यों आये
जख्म देना था तो साथ क्यों निभाए
कहानी बनाना  था तो सचाई क्यों बताये
दिल दुखाना तो प्यार क्यों जताए…

एक बार मुस्कुरा कर अपनी इच्छा बता देते
हम जिंदगी के हर छन क़दमों में लुटा देते
दोस्ती की किताब में हर पन्ना आपके नाम छपवा देते
दोस्ती के अलफ़ाज़ सुनहरे अक्षरों में गढ़वा देते…

दिया प्यार का सारे संसार में जला देते
पहेली जिंदगी की सरे आम सुलझा देते
एक बार मुस्कुरा कर अपनी इच्छा बता देते
दोस्ती के मायने हम तहे दिल से निभा देते ….

अमरदीप गौरव

ना जाने कब तक रूठी रहेगी खुशी मेरी …

ना जाने कब तक रूठी रहेगी खुशी मेरी …
ना जाने कब तक झूठी रहेगी हँसी मेरी
ना जाने कब तक बैठी रहेगी जिंदगी मेरी
ना जाने कब तक सुनाती रहेगी कहानी नयी !!

हर छन एक उमीद सी उठती है दिल में..
कभी तो खुशी आएगी मन-प्रांगन में
ललक है इस दिल की किसी की मुहब्बत मिलेगी कभी !!
हसीन सा वो मंजर न जाने कभी आएगा भी की नहीं

अपना तो गुलिस्तां इस जहान में नहीं…
क्या पता उस जहान से बुलावा आएगा की नहीं
परीयों की दुनिया में कहानियां हैं भरी
पर क्या पता उस कहानी में कभी आऊंगा भी की नहीं !!

अमरदीप गौरव

चुप रहकर हम सारे गम सहते चले गए…

चुप रहकर हम सारे गम सहते चले गए
और एहसास कागज पर उतरते चले गए …
गम सहने के हौसले हमारे बढते चले गए
अश्कों को अरमानो की मोती समझ कर संजोते चले गए…
ख्वाहिश अपनी अश्कों के समंदर में डुबोते चले गए…
और उन ग़मों के सहारे हम बुलंदियों को छुते चले गए…
जिंदगी के हर सपनों को बनाते चले गए सजाते चले गए…
और एहसास कागज पर उतरते चले गए …

अमरदीप गौरव

क्यों आज खुसी होती है उसके चले जाने के बाद !!!

खुशी होती थी कभी किसी के आने के बाद ...
आज खुशी होती है उसी के चले जाने के बाद ...
कभी वफ़ा की बातें करते न थकते थे वो हमसे ...
आज वही बातें उन्हें बेमतलब महसूस होती हैं ...
कभी चाँद भी पास हुआ करता था ...
आज चंद देखे भी मुद्दत हो गए ...
कभी जाम से साम बनते थे...
आज साम जाम के नाम हो गया...

चाहत हमरी थी न भुलायेंगे उन्हें!!
आज  कोसिस में लगे हैं अब सायद भूल जाएंगे  उन्हें...
तडपता हुआ ये मंजर कभी फुर्सत में बैठ सुनायेंगें ...
की क्यों आज खुसी होती है उसके चले जाने के बाद  !!!

अमरदीप गौरव

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.