मेरी जिंदगी के सूनेपन में आपका यूं आना मुझे अच्छा लगा
April 12, 2011 3 Comments
मेरी जिंदगी के सूनेपन में आपका यूं आना मुझे अच्छा लगा
समय की खामोशियों में आपका यूं कुछ गुनगुनाना मुझे अच्छा लगा
आपकी गुनगुनाहट में यूं मेरा खो जाना मुझे अच्छा लगा
मेरी मुस्कराहट पे आपका यूं शर्माना मुझे अच्छा लगा
हमारी दोस्ती पे यूं आपका इतराना मुझे अच्छा लगा
इस संसार में आपका यूं मिलना मुझे अच्छा लगा
मेरी कामयाबी के पीछे आपका यूं रहना मुझे अच्छा लगा
मेरी गलतियों पर आपका यूं समझाना मुझे अच्छा लगा
फूलों की तरह आपका मेरे गुलिस्तां में यूं महकना मुझे अच्छा लगा
प्यार भरी निगाहों से आपका यूं निहारना मुझे अच्छा लगा
मेरी हर ख्वाहिसो पर आपका यूं धयान रखना मुझे अच्छा लगा
नाविक की तरह आपका मेरी जिंदगी को यूं पार लगाना मुझे अच्छा लगा
आपका मेरी जिंदगी में यूं अहम हिस्सा बन जाना मुझे अच्छा लगा |
अमरदीप गौरव


Mere Ek Sawal Hai Iska Jawab De,
Ho sake To Mere Is Ilteja Ka Jawab De
Tu Karti Hai Nafrat Ya Ke Pyar Mujhe Se,
Meri Sirf Is Therir Ka Jawab De.
Mein Na Phir Tujhe Chedunga Kabhi..
Phir Na Kabhi Kahunga Ke Mujh Ko Jawab De..
Barbad Ho jaonga Tere Intezar Mein,
Ho sake To Meri Is Tehrir Ka Jawab De
Chala Jaonga Teri zindagi Se, Phir Na Aunga.
Is Liya Meri Jaan Phele Mujh Ko Jawab De
Hat jaonga Hamesha k liye Tere Raaste Se
Agar Is Per Teri Khushi Hai To Mujh Ko Jawab De…
kya baat hai koihai kya…… hmmm
bhaiya aisa hota to aapko bata jaror hahahaa..:)