उनसे हुई मुलाकातों को याद करतें हैं

April 16th, 2011 § 2 Comments

जिंदगी के रास्तें में एक चौराहे पर आकर

कभी हम उन्हें तो कभी हम

उनसे हुई मुलाकातों को याद करतें हैं

कभी समंदर के किनारे तो कभी

पगडंडियों पर हम यूं ही ठमक जातें हैं

शीतल मलय पवन में आती उनकी आवाजों में

हम यूं ही बहे चले जातें हैं यूं ही खोये चले जातें हैं

पता नहीं आगे रास्ते में उनसे हमारी मुलाकात कब होगी

जब भी होगी वादा रहा फिर अपनी आँखों को रोने न देंगे….

अमरदीप गौरव

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