बस अब तो सच्चाई की इंतिज़ार है !!!!

October 15th, 2011 § Leave a Comment

कह गए वो न जाने क्या

रह गए हम न जाने कहाँ

थम गए वक्त न जाने क्यों

हिल गयी धरती न जाने कैसे

पथ तो एक है पथिक अनेक हैं

पंथ तो एक है पंथी अनेक हैं

अन्ना तो एक है मशाल अनेक हैं

देश तो एक है देशवासी अनेक हैं

ह्रदय की पुकार है

संत की सत्कार है

जाग उठा है आज सारा हिन्दूस्तान

बस अब तो सच्चाई की इंतिज़ार है !!!!

अमरदीप गौरव

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